Chinese Smartphone Ban:

Chinese Smartphone Ban: 12,000 रुपये से सस्ते चाइनीज फोन Vivo, OPPO और शाओमी ,भारत में होंगे बैन, सरकार जल्द कर सकती है एलान- useful info

Chinese Smartphone Ban

Chinese Smartphone Ban :- चीनी कंपनियों Vivo, OPPO और शाओमी और भारत सरकार के बीच लगातार खींचतान चल रही है। सरकार के इस फैसले का मकसद एंट्री लेवल सेगमेंट में लावा, माइक्रोमैक्स जैसी घरेलू कंपनियों का दबदबा कायम करना है। भारत इस समय दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार है और इस पर चीनी कंपनियों का कब्जा है।

इस विवाद की शुरुआत सबसे पहले साल 2020 में देखने को मिलती है, जब सरकार ने 29 जून को पहली बार करीब 60 चीनी प्स पर बैन लगाया था। इसी साल सरकार ने भारत में 250 से ज्यादा चीनी ऐप्स पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद से यह विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है।

हाल ही में प्रमोटर डायरेक्टर (ईडी) ने भी चीनी कंपनियों पर गुरिल्ला कार्रवाई की है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सरकार और चीनी कंपनियों के बीच विवाद की असली वजह क्या है? भारत में चीनी मोबाइल कंपनियों पर बड़ी कार्रवाई की खबर है। खबरें आ रही हैं कि भारत में 12,000 रुपये से कम कीमत वाले चीनी फोन को बैन कर दिया जाएगा। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने लावा, माइक्रोमैक्स जैसी घरेलू कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए यह फैसला लिया है।

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डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक

सरकार के इस फैसले से शाओमी, वीवो, ओप्पो, पोको, रेडमी, रियलमी जैसी कंपनियों को बड़ा झटका लगा है, हालांकि इस मामले पर अभी तक सरकार या किसी चीनी कंपनी की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

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सरकार के इस फैसले का मकसद एंट्री लेवल सेगमेंट में घरेलू कंपनियों का दबदबा बनाए रखना है। भारत इस समय दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन मार्केट है, लेकिन कब्जा चीनी कंपनियों का है। घरेलू कंपनियां इन चीनी कंपनियों के आगे टिक नहीं पा रही हैं।

मार्केट रिसर्च फर्म काउंटरपॉइंट के अनुसार, जून 2022 तक की तिमाही के लिए भारत की बिक्री में $ 150 से कम के स्मार्टफोन का हिस्सा एक तिहाई था, जो चीनी कंपनियों से शिपमेंट का 80% था।

Chinese Smartphone Ban के बाद

chinese App 

भारत सरकार ने 2022 की शुरुआत में एक बार फिर 54 चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया। प्रतिबंधित 54 ऐप्स में Free fire, टेनसेंट, अलीबाबा और गेमिंग फर्म नेटईज जैसी बड़ी चीनी कंपनियों के ऐप्स शामिल थे।

Chinese Smartphone Ban: 12,000 रुपये से सस्ते चाइनीज फोन Vivo, OPPO और शाओमी ,भारत में होंगे बैन, सरकार जल्द कर सकती है एलान
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29 जून 2020 को सरकार ने 59 चीनी ऐप्स प प्रतिबंध लगा दिया था। यह पहला मौका था जब सरकार की ओर से इतनी बड़ी संख्या में मोबाइल ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया गया है। इस लिस्ट में सबसे पहला नाम टिकटॉक का था।

इसके अलावा कैमस्कैनर और पबजी जैसे पॉपुलर ऐप्स को भी इस लिस्ट में शामिल किया गया था। इन ऐप्स को डेटा सिक्योरिटी के लिए खतरा बताया गया था। भारत समेत अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने सरकार को इन ऐप्स को ब्लॉक करने की चेतावनी दी थी।

इसके बाद इसी साल 2 सितंबर को 47 ऐप्स पर डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक की गई थी। इसके बाद साल 2020 में 66 दिनों के भीतर ही भारत में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के तहत 224 चीनी ऐप्स को बैन कर दिया गया था।

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हालांकि, बैन किए गए कई ऐप्स 2020 में बैन किए गए ऐप्स के नए अवतार थे। अगर पिछले 2 साल में ऐप बैन की बात करें तो भारत में अब तक 350 से ज्यादा चीनी ऐप्स को बैन किया जा चुका है।

चीनी कंपनियों पर सरकार की सबसे बड़ी कार्रवाई इसी साल जुलाई में देखने को मिली थी, जब ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने एक साथ वीवो के 44 ठिकानों पर छापेमारी की |यह कार्रवाई देशभर में वीवो के दफ्तरों में की गई। 

यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत की गई थी, जिसमें ईडी ने कंपनी पर टैक्स चोरी का आरोप लगाया था। हालांकि वीवो पर पहली बार 2017 में कार्रवाई की गई थी, जिसमें जयपुर में कंपनी के रीजनल ऑफिस को जब्त कर लिया गया था।

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शाओमी से कार्रवाई की शुरुआत

चीनी कंपनियों पर मनी लॉन्ड्रिंग से लेकर टैक्स चोरी तक के आरोप लगे हैं। इसके बाद से ईडी की नजर लगातार चीनी कंपनी पर टिकी हुई थी। जिसके बाद अप्रैल 2022 में ईडी की ओर से शाओमी पर मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की गई थी। ईडी ने रैकेट में फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट, 1999 के तहत कार्रवाई करते हुए शाओमी इंडिया के बैंक खातों में जमा करीब 5,551 करोड़ रुपये जब्त किए थे। ईडी ने दावा किया था कि विदेश में पैसा भेजने के बारे में कंपनी की ओर से बैंकों को गलत जानकारी भी मुहैया कराई गई थी और यह कंपनी गलत तरीके से विदेश में पैसा भेज रही थी, जो फेमा की धारा 4 का सीधा उल्लंघन है।

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Oppo पर कार्रवाई

ओप्पो को भी सीमा शुल्क चूक मामले में इस साल जुलाई में डीआरई (राजस्व खुफिया निदेशालय) की कार्रवाई का सामना करना पड़ा था। डीआरआई ने कंपनी के ठिकानों पर छापेमारी की थी, जिसके बाद ओप्पो पर करीब 4,389 करोड़ रुपये की कस्टम चोरी का मामला सामने आया था।

संसद में उठा मुद्दा

हाल ही में 2 अगस्त को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सदन में कहा था कि चीन की तीनों मोबाइल कंपनियों के खिलाफ टैक्स चोरी के आरोपों पर सरकार की नजर है। सरकार की ओर से इन तीनों कंपनियों ओप्पो, वीवो इंडिया और शाओमी को नोटिस भी जारी किया गया है। वित्त मंत्री ने इस मामले में करीब 2981 करोड़ रुपये की ड्यूटी चोरी का भी दावा किया है।

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